शहर में अकेला आदमी
सुरेंद्र कल्याण ‘बुटाना’
शहर में
हजारों चेहरे हैं,
लाखों कदम हैं,
अनगिनत आवाज़ें हैं।
फिर भी
एक आदमी
अपने कमरे में बैठा
अकेला है।
उसके पास
सबसे तेज़ इंटरनेट है,
पर कोई ऐसा नहीं
जिसे वह अपना दुःख भेज सके।
तकनीक ने दूरी घटाई,
पर निकटता नहीं बढ़ाई।
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