स्मृतियाँ
सुरेंद्र कल्याण ‘बुटाना’
कुछ स्मृतियाँ
पुरानी किताबों की तरह होती हैं।
जितना उन्हें खोलो,
उतनी ही
सुगंध आती है।
और हर पन्ने पर
एक बीता हुआ जीवन
मुस्कुराता मिलता है।
कुछ स्मृतियाँ
पुरानी किताबों की तरह होती हैं।
जितना उन्हें खोलो,
उतनी ही
सुगंध आती है।
और हर पन्ने पर
एक बीता हुआ जीवन
मुस्कुराता मिलता है।