माँ की अलमारी

15-09-2026

माँ की अलमारी

सुरेंद्र कल्याण ‘बुटाना’ (अंक: 302, सितम्बर द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)

 

माँ की अलमारी में
कुछ साड़ियाँ नहीं,
पूरा एक युग रखा था।
 
 एक कोने में
मेरे बचपन की हँसी थी,
दूसरे कोने में
पिता की अधूरी चिंताएँ।
 
माँ चली गई,
 
पर अलमारी आज भी
घर का सबसे जीवित कमरा है।

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