रोटी और सपने

15-09-2026

रोटी और सपने

सुरेंद्र कल्याण ‘बुटाना’ (अंक: 302, सितम्बर द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)

 

रोटी
शरीर को जीवित रखती है,
 
सपने
आत्मा को।
 
जिस आदमी के पास
सिर्फ रोटी है,
वह जीवित है।
 
जिसके पास
सपने भी हैं,
वह जीवन जी रहा है।
 
सभ्यता की सबसे बड़ी त्रासदी
भूख नहीं,
सपनों का मर जाना है।

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