गाँव की शाम

15-06-2026

गाँव की शाम

सुरेंद्र कल्याण ‘बुटाना’ (अंक: 299, जून द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)

 

गाँव की शाम में
एक अलग ही शान्ति होती है। 
सूरज ढलता है, 
पक्षी लौटते हैं, 
और दिन भर की थकान
धीरे-धीरे
हवा में घुल जाती है। 
जैसे प्रकृति कह रही हो—
अब विश्राम करो। 

0 टिप्पणियाँ

कृपया टिप्पणी दें