पृथ्वी
सुरेंद्र कल्याण ‘बुटाना’
पृथ्वी
सबकी माँ है।
वह किसी से
भेदभाव नहीं करती।
अन्न उगाती है,
जल देती है,
छाँव देती है।
फिर भी
मनुष्य उसे
सबसे कम समझता है।
पृथ्वी
सबकी माँ है।
वह किसी से
भेदभाव नहीं करती।
अन्न उगाती है,
जल देती है,
छाँव देती है।
फिर भी
मनुष्य उसे
सबसे कम समझता है।