एक अच्छा मनुष्य
सुरेंद्र कल्याण ‘बुटाना’
इस युग में
सफल होना कठिन है,
पर असम्भव नहीं।
धन कमाना कठिन है,
पर सम्भव है।
नाम कमाना भी
सम्भव है।
पर एक अच्छा मनुष्य बनना
सबसे कठिन कार्य है।
क्योंकि
उसके लिए
प्रतिभा नहीं,
चरित्र चाहिए।
उसके लिए
ज्ञान नहीं,
विवेक चाहिए।
उसके लिए
शक्ति नहीं,
संवेदना चाहिए।
एक अच्छा मनुष्य
वह है
जो दूसरों की पीड़ा को
अपनी सुविधा से ऊपर रख सके।
जो सफलता में
विनम्र रहे,
और असफलता में
धैर्यवान।
जो अपने लिए नहीं,
समाज के लिए भी सोच सके।
इतिहास
महान लोगों को याद रखता है,
पर मानवता
अच्छे लोगों के सहारे चलती है।
और शायद
जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि
यही है—
कि हमारे कारण
किसी का दुःख थोड़ा कम हुआ हो,
किसी की आशा थोड़ी बढ़ी हो,
और यह संसार
थोड़ा अधिक मानवीय बना हो।
0 टिप्पणियाँ
कृपया टिप्पणी दें
लेखक की अन्य कृतियाँ
- कविता
-
- अंतिम चिट्ठी
- अंतिम प्रश्न
- आदमी की तलाश
- आदमी के भीतर
- उत्तराधिकारी
- एक अच्छा मनुष्य
- करुणा
- करुणा का घर
- गाँव की शाम
- गाँव जो अब भी बसता है
- जीवन
- दीपक
- नदी
- नदी का धर्म
- पृथ्वी
- पृथ्वी की चुप्पी
- पृथ्वी की थकान
- प्रमाण
- बूढ़ा पेड़
- बूढ़ा पेड़
- भविष्य के नाम
- भारत विभाजन और मानवीय दर्द
- मन की खिड़की
- मनुष्य का घर
- मनुष्य होने का अर्थ
- माँ की अलमारी
- मौन
- मौन - 1
- युद्ध के बाद
- रोटी और सपने
- शहर में अकेला आदमी
- सभ्यता
- समय का पेड़
- समय की धूल
- समय के सामने
- स्मृतियाँ
- स्मृतियों का उजाला
- विडियो
-
- ऑडियो
-