दीपक

सुरेंद्र कल्याण ‘बुटाना’ (अंक: 299, जून द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)

 

दीपक
सूरज नहीं बनना चाहता। 
वह केवल
अपने हिस्से का अँधेरा
कम करता है। 
शायद
मनुष्य को भी
ऐसा ही होना चाहिए। 

0 टिप्पणियाँ

कृपया टिप्पणी दें