आदमी की तलाश
सुरेंद्र कल्याण ‘बुटाना’
आदमी
सारी दुनिया घूम आया,
पर स्वयं तक
नहीं पहुँच पाया।
वह शहरों में गया,
पहाड़ों तक गया,
समुद्रों को देखा,
पर जो प्रश्न
उसके भीतर था,
वह वहीं रहा।
आदमी
सारी दुनिया घूम आया,
पर स्वयं तक
नहीं पहुँच पाया।
वह शहरों में गया,
पहाड़ों तक गया,
समुद्रों को देखा,
पर जो प्रश्न
उसके भीतर था,
वह वहीं रहा।