समय का पेड़
सुरेंद्र कल्याण ‘बुटाना’
समय
किसी पेड़ की तरह बढ़ता है।
हम उसकी छाया में
जीते रहते हैं,
पर उसकी जड़ों को
नहीं देख पाते।
एक दिन
जब पीछे मुड़कर देखते हैं,
तो पाते हैं
कि वर्षों का एक जंगल
हमारे पीछे खड़ा है।
समय
किसी पेड़ की तरह बढ़ता है।
हम उसकी छाया में
जीते रहते हैं,
पर उसकी जड़ों को
नहीं देख पाते।
एक दिन
जब पीछे मुड़कर देखते हैं,
तो पाते हैं
कि वर्षों का एक जंगल
हमारे पीछे खड़ा है।