करुणा

सुरेंद्र कल्याण ‘बुटाना’ (अंक: 299, जून द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)

 

जब शब्द
साथ छोड़ देते हैं, 
तब करुणा बोलती है। 
वह किसी भाषा की
मोहताज नहीं होती। 
एक स्पर्श, 
एक सहारा, 
एक सच्ची दृष्टि—
यही उसका व्याकरण है। 

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