करुणा
सुरेंद्र कल्याण ‘बुटाना’
जब शब्द
साथ छोड़ देते हैं,
तब करुणा बोलती है।
वह किसी भाषा की
मोहताज नहीं होती।
एक स्पर्श,
एक सहारा,
एक सच्ची दृष्टि—
यही उसका व्याकरण है।
जब शब्द
साथ छोड़ देते हैं,
तब करुणा बोलती है।
वह किसी भाषा की
मोहताज नहीं होती।
एक स्पर्श,
एक सहारा,
एक सच्ची दृष्टि—
यही उसका व्याकरण है।