मौन - 1
सुरेंद्र कल्याण ‘बुटाना’
सब बोल रहे थे।
इतना बोल रहे थे
कि
सच को
अपनी बारी ही नहीं मिली।
तब
मौन ने कहा—
"जब शब्द
व्यापार बन जाएँ,
तब
चुप रहना भी
एक प्रतिरोध है।"
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