मैं मुस्कुरा रहा हूँ
मंजु आनंद
मैं मुस्कुरा रहा हूँ,
तुमसे मिलूँगा,
तो शायद हँस भी दूँ,
हो सकता हैं खिलखिला उठूँ,
क़हक़हे भी लगा दूँ।
तुम हैरानी से मुझे देखोगे,
मन ही मन मुझे पागल कहोगे।
सोचोगे . . .
मैंने तो कोई हँसी वाली बात कही ही नहीं।
मेरे मुस्कुराने की वजह तलाशोगे।
वजह कोई नहीं हैं, मेरे दोस्त।
बस आज ग़म कुछ ज़्यादा ही क़रीब आ गया था,
फिर कसकर मुझे गले लगा लिया था।
फिर क्या था,
मैं मुस्कुराने लगा।
तब से मैं मुस्कुरा ही रहा हूँ।
मैं मुस्कुरा रहा हूँ।
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