मेरी कवितायें
जयचन्द प्रजापति ‘जय’
मेरी कवितायें
आह से निकलती हैं
खोखलापन नहीं
कोई राग द्वेष नहीं
सीधे सरल लिबास में
मधुर भावना लिये
कोमल कहानी जैसे
एक सौंधी महक सी
चाँदनी रात सी
एक धवल वसन की तरह
कोई आवरण नहीं
खुले दरवाज़े की तरह
होती हैं मेरी कवितायें
बिल्कुल निडर योद्धा की तरह
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