बिल्लो रानी कहो तो जान दे दूँ
जयचन्द प्रजापति ‘जय’बिल्लो रानी को एक मज़बूत प्रेमी की आश्यकता महसूस हुई। वह उसी को अपना प्रेम समर्पण करेगी जो जान देने की जंग में सफल होगा। बड़े-बड़े प्रेमी बिल्लो रानी को प्राप्त करने के लिए अपनी जान तक भी देने को तैयार हैं।
बिल्लो रानी ने एक स्वयंवर का आयोजन किया। बिल्लो रानी को वही प्राप्त कर सकता है जो बिल्लो रानी के लिए जान देने को तैयार है। एक से एक लोग इस स्वयंवर में आने की तैयारी करने लगे।
एक प्रेमी का हृदय बैठा जा रहा है कि मैं जान दे दूँगा तो बिल्लो रानी हमारी कहाँ हो पायेगी। किसी और के अंक में चली जायेगी। सतोष की रोटी खाओ, बिल्लो रानी को भगाओ।
एक प्रेमी ने ज़ोर-शोर से तैयारी की। ऊठक-बैठक करना शुरू कर दिया। तरह-तरह की पौष्टिक सब्ज़ियाँ तथा फलफूल खाने लगा। तेल मालिश उबटन करने लगा।
बिल्लो रानी सस्ते में मिलने वाली नहीं है। बहुत रियाज़ करना पड़ेगा। जान की परवाह न करने वाला ही बिल्लो का घूँघट उठायेगा। बिल्लो रानी उसी की घर की दुल्हनिया बनेगी।
बिल्लो रानी ने कहा “जो मेरे लिए फाँसी पर चढ़ेगा उसी की सदा-सदा लिए मैं हो जाऊँगी और मेरी करोड़ों की संपत्ति का वह मालिक बन जायेगा।”
एक प्रेमी तो चक्कर खा कर गिर गया। दूसरा तो स्वयंवर से बेचारा भाग निकला। तीसरे ने तो आत्म समर्पण कर दिया कि यह मेरे बस का नहीं है। मैं बिना बिल्लो रानी के ही रह लूँगा।
बिल्लो रानी एक परम सुंदरी है। ढेर सारे प्रेमियों ने भौकाल बनाया लेकिन बिल्लो को अपना नहीं बना सके। अब बेचारी अकेले ही जीवन काट रही है।
बिल्लो रानी को अपना बना लेने के लिए ढेर सारे लोग वकालत करते हैं कि कहो तो जान दे दूँ। पर आज तक कोई जान नहीं दे पाया। बिल्लो रानी भी उसी से ब्याह करेगी जो उसके लिए जान देगा। बिल्लो रानी अभी कुँवारी है। उसके लिए वही वर होगा जो उसके लिए जान देने को तैयार होगा।