जाड़ा आया

जयचन्द प्रजापति ‘जय’ (अंक: 288, नवम्बर द्वितीय, 2025 में प्रकाशित)

 

देखो बच्चो, जाड़ा आया। 
सबसे प्यारा मौसम आया॥
 
स्वेटर, टोपी साथ में लाया। 
हल्की-हल्की छींक भी लाया॥
 
रजाई और तकिया भी लाया। 
शादी की शहनाई भी लाया॥
 
हरी-हरी तरकारी भी लाया। 
जाड़ा गली-मोहल्ले से आया॥ 
 
हरे मटर की फलियाँ लाया। 
सरसों की पीली चादर लाया॥
 
घर में नया-नया मेहमान आया। 
देखो प्यारे ये ठंडी हवा लाया॥
 
धरती पर कोमल मुस्कान लाया। 
देखो बच्चो, मस्ती में जाड़ा आया॥

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