देश के नेताओ
जयचन्द प्रजापति ‘जय’
कुछ ऐसी चाल चलो
खिल जाये चमन
बहे मस्त पुरवाई
होंठों पर ख़ुशी छलके
लाना ऐसी योजना
महक-चहक पड़े
सूनी गलियाँ भी
चौराहे पर खड़ा आदमी
जय-जयकार करे
ऐसे नेताओं की
जिसमें नहीं है मानव कल्याण
क्या करेगा देशसेवा
झूठे वादों पर
नहीं टिकती राजनीति
ऐसी राजनीति
अलाव की तरह है
जहाँ सिर्फ़ राख बचती है
सुनो, देश के नेताओ
मेरी बात सुनो!
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