भालू भोला और गुंजन की दोस्ती

15-12-2025

भालू भोला और गुंजन की दोस्ती

जयचन्द प्रजापति ‘जय’ (अंक: 290, दिसंबर द्वितीय, 2025 में प्रकाशित)

 

एक हरे-भरे जंगल के पास बसे प्रयागराज के छोटे से गाँव में एक बड़ा सा भालू भोला भटकते हुए आ गया। गाँव की नन्ही गुंजन और उसके दोस्तों ने पहली बार भालू देखा तो आँखें चमक उठीं। वे डरने के बजाय ख़ुशी से उछल पड़े। 

गुंजन ने सबसे पहले भोला को टॉफ़ी खिलाई, उसके दोस्त ने ठंडा पानी पिलाया, तो किसी ने रसीले आम तो किसी ने कुरकुरे दिए। 

भोला ने इतना प्यार देखा तो उसका दिल पिघल गया। उसने पास के बाग़ से मीठे अमरूद, केले और बेर तोड़े और सब बच्चों को बाँट दिए। बच्चे इतने ख़ुश हुए कि नाचने लगे। 

भोला अब रोज़ गाँव आता। बच्चे उसके साथ जंगल की सैर करते, फल इकट्ठा करते और गीत गाते। एक दिन भोला ने कहा, “जानवर भी प्रेम के भूखे होते हैं, बस प्यार दो तो सब कुछ दे देंगे।” 

इस दोस्ती ने गाँव को सिखाया कि सच्चा दोस्त दिल से बनता है। गुंजन की तरह हर बच्चा समझ गया कि मदद और प्यार से दुनिया सुंदर हो जाती है। 

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