आलोचक की आलोचना
जयचन्द प्रजापति ‘जय’
रामस्नेही एक कवि थे। उदारता से भरी रचनायें लिखते थे। उनकी ख्याति देश के कोने-कोने तक हुई। उनकी एक कविता एक आलोचक के हाथ लग गयी। गुणी आलोचक थे। बड़े-बड़े लेखकों की आलोचना करके बड़ी उपलब्धि हासिल की थी।
कुछ लोगों ने उन्हें आलोचना का महामना कहा। आलोचक महोदय भी प्रसिद्धि की सीमा पार कर चुके थे। आलोचक ने रामस्नेही की कविता की आलोचना लिखी। आलोचना का एक-एक तत्त्व उड़ेल दिया। उनकी आलोचना का जितना गरल था—सब उनकी कविता पर बहा दिया।
ईर्ष्या की कुदृष्टि इतनी कूट-कूट कर भरी थी कि कविता की आत्मा तक कराह उठी। जब कविता की आत्मा कराह उठे, कवि अपनी कविता की आलोचना सुनकर कवि की रूह काँपने लगे तो समझो आलोचना ने अपने अंतिम रूप को प्राप्त कर लिया है अर्थात् आलोचना पूर्णरूपेण सफल रही।
कवि रामस्नेही अपनी कविता की आलोचना सुनकर चारों खाने चित्त हो गये। जिह्वा से शुद्ध शब्द नहीं निकल पा रहे थे। उनके आँखों से झर-झर आँसू बह पड़े। इतनी ख़ूबसूरत कविता का ऐसा पोस्टमार्टम आलोचक महोदय ने कर दिया कि कवि महोदय को मुर्छा आ गयी। बिना संजीवनी के कवि की मुर्छा, तारीफ़ करने वाला आलोचक ही ठीक कर सकता है।
कवि बहुत चिंतित हुआ कि आलोचना ठीक से नहीं की गयी। लगता है कि आलोचक जी ने आलोचना के समस्त गुण का ग़लत मरहम लगा दिया जिससे ग़लत प्रतिक्रिया हुई। कवि महोदय ने आलोचक के पास पारितोषिक भेजा और कविता पर फिर आलोचना लिखने का निवेदन किया।
कविता पर फिर से आलोचना लिखी गयी। पारितोषिक पाकर आलोचक जी का हृदय गद्गद् हो गया। कविता के समस्त अवगुण, गुण में परिवर्तित हो गए। तारीफ़ों की ऐसी बारिश की गयी कि कवि महोदय ने ऐसा महसूस किया जैसे संगम में डुबकी लगा लिये और इस भवसागर से पार हो गये।
0 टिप्पणियाँ
कृपया टिप्पणी दें
लेखक की अन्य कृतियाँ
- हास्य-व्यंग्य आलेख-कहानी
- कविता
-
- आदिवासी बच्चियाँ
- उनका हिस्सा
- उषा का आगमन
- एक थे अटल
- एक नाबालिग़ लड़की
- कोहरा
- कोहरे में
- देश के नेताओ
- निष्ठुर समय
- पर्वत, जो मूक खड़े हैं
- पीढ़ियाँ
- पूस की रात
- बसंत
- मत सताना
- मेरी कवितायें
- मेरी दृष्टि
- मैंने भागकर शादी कर ली
- वह मज़दूर
- सर्दी में एक स्त्री
- सुकून चाहता हूँ
- हम वेश्या हैं
- हँसने दो
- हारे लोग
- हे नवांकुरो
- बाल साहित्य कविता
- चिन्तन
- बाल साहित्य कहानी
- किशोर साहित्य कहानी
- हास्य-व्यंग्य कविता
- कहानी
- लघुकथा
- ललित निबन्ध
- विडियो
-
- ऑडियो
-