अशिष्टों की औक़ात

01-09-2026

अशिष्टों की औक़ात

जयचन्द प्रजापति ‘जय’ (अंक: 301, सितम्बर प्रथम, 2026 में प्रकाशित)


उनकी अशिष्ट भाषा ने 
तुमको चोट पहुँचायी है

तुम्हें धैर्य नहीं खोना है
एक विशाल वृक्ष की तरह
डगमगाना नहीं
 
उन्होंने तुम्हें गाली दी है
वीर पुरुष की तरह
उनकी इस मूर्खता पर
अफ़सोस भी नहीं जताना है
 
क्योंकि क्रोध की अग्नि
उनको धीरे-धीरे जला रही है
 
एक दिन जब तुम
विशालता को प्राप्त करोगे
 
तब उनकी आत्मा 
सड़ी लकड़ी की तरह 
एकदम से टूटी होगी

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