प्रेम-लगन

31-12-2004

प्रेम-लगन

सुमन कुमार घई

मधुर स्मृति, तुम्हारी सजन
बीती रात का सुखद मिलन
शीतल जल, लगाए अगन


तुम्हारी गंध भरी पवन
भर अंक में हो प्रेम मगन
उष्ण श्वासों की सरगम
गुंजित अभी तक अन्तर्मन


प्रेम विह्वल हो मेरा मन
ढूँढे तुम्हें मदमाता यौवन
बस एक लगन बस एक लगन
प्रिय भोगूँ फिर तुम्हारी छुअन


मधुर स्मृति, तुम्हारी सजन
बीती रात का सुखद मिलन
शीतल जल, लगाए अगन
 

0 Comments

Leave a Comment

लेखक की अन्य कृतियाँ

कविता
किशोर साहित्य कविता
सम्पादकीय
पुस्तक समीक्षा
कहानी
विडियो
ऑडियो