हम ही हैं, भारत के मतदाता
वेद भूषण त्रिपाठी
(राष्ट्रीय मतदाता दिवस)
हम भारत हैं।
हम ही हैं, भारत के मतदाता॥
जनजीवन का भाग्य बदलते
हम ही हैं, भाग्य विधाता।
हम भारत हैं।
हम ही हैं, भारत के मतदाता॥
जन-जन को जागृत करके
मानवीय कल्याण कराएँ।
स्नेह भाव से मतदेय-स्थल
मतदान करने जाएँ।
अंतरात्मा की आवाज़ को
भूल से भी न बिसराएँ।
दबाव, प्रलोभन, दुर्भाव में
मताधिकार न अपनाएँ।
जाति-धर्म संप्रदाय से ऊपर उठकर
मताधिकार अपनाएँ।
शत-प्रतिशत मतदान कराकर
राष्ट्र का मान बढ़ाएँ।
हम भारत हैं।
हम ही हैं, भारत के मतदाता॥
जनजीवन का भाग्य बदलते
हम ही हैं, भाग्य विधाता।
हम भारत हैं।
हम ही हैं, भारत के मतदाता॥
0 टिप्पणियाँ
कृपया टिप्पणी दें
लेखक की अन्य कृतियाँ
- कविता
-
- अखण्ड भारत
- अमृत-जल
- अयोध्या धाम
- एक पेड़ माँ के नाम
- एक भारत श्रेष्ठ भारत
- गणतंत्र दिवस
- गति से प्रगति
- जल-महिमा
- तीर्थराज प्रयाग
- दीपोत्सव
- धर्म-ध्वजारोहण
- नमामि गंगे
- नव वर्ष
- नव-संवत्सर
- पावन पुण्य सलिला सरयू
- मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम
- माँ अन्नपूर्णा: अन्न वरदान
- मातृशक्ति
- मेरी माटी मेरा देश
- योग ॠषि
- रामलला की प्राणप्रतिष्ठा
- लोकतंत्र
- लोकतंत्र का महापर्व
- वन-महोत्सव
- शत-शत नमन!
- श्रवण-धाम महोत्सव
- सजग बनो मतदाता
- सम-नागरिकता
- स्वच्छोत्सव
- स्वातंत्र्योत्सव: हर घर तिरंगा
- हम ही हैं, भारत के मतदाता
- हरेला पर्व
- हिंदी भारत माँ की बिंदी
- हिमालय संरक्षण दिवस
- किशोर साहित्य कविता
- विडियो
-
- ऑडियो
-