शैलजा सक्सेना - 14 हाइकु

08-01-2019

शैलजा सक्सेना - 14 हाइकु

डॉ. शैलजा सक्सेना

1.
मेघ घिरते
गिलहरी सी धूप,
भागी, दुबकी !
2.
ऊँची बिल्डिंगें
कटा फटा रूमाल
आकाश झाँके !

3.
जूही, कनेर
से भाव मेरे, क्लांत
जेठ यथार्थ !

4.
दोस्ती ख़ुश्बू
हाथ पकड़े डोले
दूरियों में भी !
5.
गद्य जीवन
कवितामय तुम हो
गाऊँ तो कैसे?
6.
कड़ी सुरक्षा!
नफ़रत घूमती
चारों ओर फिर भी !

7.
युग बदले
दुनिया भी बदली
आदमी वही !

8. 
शोर सैलाब
बहे हर आवाज़
सुनें- बोलें क्या?

9.
दूजे पर अँगुली
उठाता हर कोई
अपनी छूट !

10. 
(शीर्षक -पंजाब)
नशे में डूबे
बच्चे खेतिहर के
धरती रोये !

11. 
पेड़ लटकी
लाश कोई और क्या?
हम ही तो हैं !!
12. 
सूना आँगन
गौरैया ढूँढे दाना
कहाँ हैं लोग?
13.
मेरी पहचान
अब भी टँगी है
तेरी आँखों में !

14.
चिंता तुम्हारी
नींद उड़ाये मेरी
ये क्या हिसाब?

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