अकेलापन..
अहसास मन का,

संग-साथ..
कब जीवन भर का ?

वादे ..
रहे अधूरे

सपने..
कब हुए पूरे?

इच्छा..
समुद्री तरंगें,

आशा..
जगाती उमंगें,

अनुभव..
कब सदा मीठा?

यथार्थ.
रहा सदा सीठा,

जाना..
कब स्वीकारा?

इसीलिए..
मन रहा हारा।।

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