सोया हूँ मैं मरा नही हूँ मैं
इरफ़ान अलाउद्दीन
बहरे खफ़ीफ मुसद्दस मख़बून
फ़ाइलातुन मुफ़ाइलुन फ़ेलुन
2122 1212 22
देख मुझ को कहाँ नहीं हूँ मैं
तेरी ख़ातिर खड़ा नहीं हूँ मैं
रात मुझ को भिगा रही थी वो
देख मुझ को सड़ा नहीं हूँ मैं
गोरकन को पता नहीं शायद
सोया हूँ मैं मरा नहीं हूँ मैं
रास्ते अलग हो गए हैं अब
हम-सफ़र से रुठा नहीं हूँ मैं
गहमा गहमी बनी हुई है क्यों
उस से कह दो यहाँ नहीं हूँ मैं
गोरकन=क़ब्र खोदने वाला