बेवफ़ाओं से मुहब्बत
इरफ़ान अलाउद्दीनबहरे रमल मुरब्बा सालिम
फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन
2122 2122
बेवफ़ाओं से मुहब्बत
हाँ यही तो है इबादत
कौन है जो ये करेगा
काम की है ये इमामत
देखता हूँ जब चहेरा
याद आती है तिलावत
होंठ हिलते तो नहीं है
क्या करूँगा मैं शिकायत
मैं अकेला हूँ जहाँ में
साथ दे मेरा क़यामत
हक़्क़ मेरा तो अदा कर
या ख़ुदा कर तू करामत
इमामत=क़ुरआन पढ़ाने का काम; तिलावत=क़ुरआन पढ़ना/ सुनाना