मुहावरों वाली कविता
अजयवीर सिंह वर्मा ’क़फ़स’
सोचता हूँ तेरा तिया पाँचा1 करता चलूँ
यहाँ से जा रहा था गर्दन नापता चलूँ
ख़ुलूस का पैग़ाम फैला कर दुनिया में
एक अनार से सौ बीमार2 करता चलूँ
इज़हार किया है उसने 'क़फ़स' मुझसे
सोचता हूँ जवाब तीन पाँच3 करता चलूँ
शायद यक़ीन आए मेरे इश्क़ पर अगर
मुसीबतें तेरी नौ दो ग्यारह4 करता चलूँ
मोहब्बत भी तो एक तिजारत है सनम
क्यों न बारह हज़ार के लाख5 करता चलूँ
जब आ ही गया हूँ तेरी गली में सनम
जाते जाते क्यों न आँखें चार6 करता चलूँ
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तिया पाँचा करना= किसी पीछा छुड़ाना
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गर्दन नापना= किसी को मार देना
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एक आनर सौ बीमार= वस्तु कम और माँग अधिक
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तीन पाँच करना= इधर-उधर की बात कर के टाल मटोल करना
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नौ दो ग्यारह= ग़ायब हो जाना, भाग जाना
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लाख के बारह हज़ार करना= व्यवसाय नुकसान उठाना, रचना में इस मुहावरे का उल्टा प्रयोग किया गया है
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आँखें चार करना= आमने सामने देखना या होना