प्रेम जीवित रहता है

01-05-2026

प्रेम जीवित रहता है

मनोज शाह 'मानस' (अंक: 296, मई प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

क़समें साथ ले जाने की 
साथ अनंत तक 
हो न सका 
फिर भी . . ., 
यात्रा तो 
अनंत तक की थी . . .! 
 
चलते चलते 
दो राहें तो 
ज़रूर आती हैं 
परन्तु . . .
दो राहें 
हमारे लिए भी 
हो सकती हैं 
यह बात कहाँ सोची थी . . .? 
 
प्यार प्रेम पूरा था 
बस, बिछड़ना ही 
नियति बना . . ., 
 
फिर भी 
बिछड़ जाने से 
प्रेम ख़त्म हो जाना 
ऐसा कहाँ होता है . . .? 
 
प्रेम का एहसास 
जब तक है साँस 
प्रेम तो जीवित रहता है . . .! 

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