हे नवांकुरो

15-07-2026

हे नवांकुरो

जयचन्द प्रजापति ‘जय’ (अंक: 301, जुलाई द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)


हे नवांकुरो! 
घबराना मत
लिखते रहना
क़लम को मज़बूत रखना
मत डरना आलोचनाओं से
 
सच लिखना तुम
एक दिन तुम भी
आग की भट्टी से
पककर निकलोगे
 
तब तुम्हारी रचनायें
परिपक्व होंगी
 
यह आसमाँ तुम्हारा होगा
तुम भी अंकित हो जाओगे
इतिहास के पन्नों में
 
तब तुम ख़ुश्बू बनकर
पूरे क्षितिज तक
तुम ही तुम होगे

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