शैतान धोका दे रहा इंसान बन के अब

01-01-2026

शैतान धोका दे रहा इंसान बन के अब

निज़ाम-फतेहपुरी (अंक: 291, जनवरी प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

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शैतान धोका दे रहा इंसान बन के अब
कुछ लोग जी रहे यहाँ शैतान बन के अब
 
जाहिल थे जो ज़माने में हुक्काम हो गए
क़ाबिल को जीना पड़ रहा दरबान बन के अब
 
अज्ञानी ज्ञान दे रहा कैसा ये दौर है
जनता बिचारी सुन रही नादान बन के अब
 
पहले फ़क़ीर संत होते थे अच्छे लोग 
झूठे हैं जो वो ठग रहे भगवान बन के अब
 
कल तक ज़मीन पर थे जो वो आज उड़ रहे
मिलते हैं जब कभी भी तो अनजान बन के अब
 
नफ़रत मिटा के बाँट रहे प्यार अच्छे लोग
जो फ़ितरती हैं जी रहे हैवान बन के अब
 
उस घर का हाल देख के हैरत में है निज़ाम
क़ातिल भी आ रहा जहाँ मेहमान बनके अब

—निज़ाम फतेहपुरी
 

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