दम में नहीं है दम कोई फिर भी नहीं है कम

15-12-2025

दम में नहीं है दम कोई फिर भी नहीं है कम

निज़ाम-फतेहपुरी (अंक: 290, दिसंबर द्वितीय, 2025 में प्रकाशित)

मफ़ऊल फ़ाइलात मुफ़ाईल फ़ाइलुन
221    2121    1221    212
  
दम में नहीं है दम कोई फिर भी नहीं है कम। 
हर शख़्स कह रहा है कि आगे रहेंगे हम॥
 
शेरो सुख़न की दुनिया में कुछ ऐसे खो गया। 
सुख में रहा न ख़ुश कभी दुख का रहा न ग़म॥
 
कुर्सी पे बैठकर वही औक़ात भूला है। 
झूठा है ख़ानदानी जो मक्कार है परम॥
 
कलयुग का सच यही है कि सच पे है भारी झूठ। 
सच-सच है प्यार कर ले तू नफ़रत करे अथम॥
 
झूठी चमक है दुनिया की झूठी है साँस ये। 
नाड़ी हकीम पकड़े है फिर भी गई वो थम॥
 
अच्छे बुरे का फ़ैसला तो होगा हश्र में। 
करता है काम नेक जो आहिस्ता निकले दम॥
 
भौं ऑंख सब फड़क रही उल्टी निज़ाम की। 
विद'अत को मानता नहीं चाहे जो हो सनम॥

—निज़ाम फतेहपुरी 

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