उषा का आगमन

01-02-2026

उषा का आगमन

जयचन्द प्रजापति ‘जय’ (अंक: 293, फरवरी प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

उषा की आ रही है सवारी
नवगीत गा रही मधुबेला
 
नव लय है, नव ताल से सजा है
प्रेम रस से भीग रही है उषा
 
कल-कल करती नदियाँ
कलरव करती चिड़ियाँ
 
उषा वधू के स्वागत करने
नभ में छाये सारे तारागण
 
मधुमय हुई है उषा की बेला
चंचल सा तन मन हो गया है
 
चिड़ियों के कलरव से गूँजा आसमां
उषा की लालिमा से सज गया आसमां

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