मत सताना
जयचन्द प्रजापति ‘जय’
जो मानव हो निर्बल
देख उसकी हालत पर
मत सताना उनको
उनकी आह लगेगी तुम्हें
हो सके तो करना
उनके लिए कुछ
उनका बनना सहारा
यही सच्चा जीवन है
नहीं सक्षम हो मदद करने में
मत देना उसको पीड़ा
जो निर्बल हो तन-मन से