कोहरे में
जयचन्द प्रजापति ‘जय’
कोहरे में
मैं कुछ दूर चला
बहुत लोग ठिठुरे हुए मिले
कुछ आग तापते मिले
कुछ सड़कों पर पन्नियाँ बीनते
कुछ औरतें छोटे-छोटे बच्चों के साथ
भीख माँगती हुई सड़कों पर
बहुत ही कम कपड़ों में
कुछ रईसज़ादियाँ लड़कियाँ भी
सड़कों पर कम कपड़े में दिख रहीं थीं
एक विपन्नता में कम कपड़े पहना है
एक सम्पन्नता में कम कपड़े पहना है!