एकलव्य कविता-1

01-01-2026

एकलव्य कविता-1

डॉ. ज़हीर अली सिद्दीक़ी  (अंक: 291, जनवरी प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

किरदारों में नाम तुम्हारा 
अमर और जीवंत सदा 
कुल निषाद हस्तिनापुर की 
गौरवगाथा गान सदा . . . 
 
जब प्रकृति नाम पुकारे 
कुल तुम्हारा सदा दुलारे 
प्रकृति रक्षक नाम ना दूजा 
किरदारों में आपकी पूजा . . . 
 
अर्जुन नाम जाप जब होगा 
उनसे ऊपर आपका होगा 
एक बाण से नेत्र को भेदा
दूसरा बिन क्षति मुँह में ठूँसा . . . 
 
इच्छाशक्ति के किरदारों में 
जाप आपके नाम का होगा 
असंभव के गलियारों में 
सम्भव नाम आपका होगा . . . 

0 टिप्पणियाँ

कृपया टिप्पणी दें

लेखक की अन्य कृतियाँ

कविता
हास्य-व्यंग्य कविता
हास्य-व्यंग्य आलेख-कहानी
सामाजिक आलेख
नज़्म
लघुकथा
कविता - हाइकु
विडियो
ऑडियो

विशेषांक में