ज़ुल्म कितना वो ज़ालिम करेगा यहाँ

01-08-2020

ज़ुल्म कितना वो ज़ालिम करेगा यहाँ

निज़ाम-फतेहपुरी

 

ग़ज़ल- 212 212 212 212
फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन


ज़ुल्म कितना वो ज़ालिम करेगा यहाँ
तख़्त से  एक  दिन  तो  हटेगा यहाँ


जितने आए  सिकंदर  चले  सब गए
कब  हमेशा  रहा   जो   रहेगा  यहाँ


आग नफ़रत की मिलके बुझाएँगे हम
भाई  भाई  गले  फिर  मिलेगा  यहाँ


बाद पतझड़  के  आती   बहारें सदा
फिर से गुलशन हमारा खिलेगा यहाँ


काम ऐसा करो  की  ख़ुदा  ख़ुश रहे
लेके जाएगा  क्या  जब  मरेगा यहाँ


ताज़  तेरा   रहा    है   न   मेरा  रहा
वक़्त के साथ हर  दम  फिरेगा यहाँ


अपना आईन है कितना अच्छा 'निज़ाम'
जो भी  तोड़ेगा  इसको  मिटेगा  यहाँ


– निज़ाम-फतेहपुरी

0 टिप्पणियाँ

कृपया टिप्पणी दें