वापसी
अवनीश कश्यप
मैं उसे भूल आया,
इस ग़म में कि
मैं कौन था?
मैं कौन था इंतज़ार में?
लम्हों के ख़ातिर,
पल-दो पल की बातों के ख़ातिर,
सपनों के ख़ातिर,
तो कभी नींद के ख़ातिर,
किताबों से लिपट, जानने मैं कौन था।
वापस ज़िंदगी के पते यूँ लौट आया,
मैं उसे भूल आया।