पहली मुलाक़ात 

01-01-2026

पहली मुलाक़ात 

अवनीश कश्यप (अंक: 291, जनवरी प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

कभी गुज़र के राह से, 
न मिल सका उससे भला, 
क्या ख़ूब था सफ़र भी वो
क्या ख़ूब था मंज़र भला। 
 
ले आए संग दीवानगी, 
रवानगी, वो इस क़द्र, 
मैं ढूँढ़ता रहा मुझे, 
भले ही घर को घर मिला। 
 
सवाल था जब दर्द का, 
हर्ज था और क़र्ज़ था, 
मिटा के भर ले आया वैसा, 
महँगा पड़ा बस्ता भला। 
 
जज़ीबियत से भरी, 
किताब थी या जान थी, 
मिल कर ऐसा घुल गई, 
जैसे मिलती, रूह को प्रेम भला। 

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