उसकी महफ़िल में मेरी बात कर ऐ सन्नाटा
सत्यवान साहब गाज़ीपुरी
रमल मुसम्मन मख्बून महज़ूफ़ मक़तू
फ़ाएलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ेलुन
2122 1122 1122 22
उनसे पहली-सी मुलाक़ात कर ऐ सन्नाटा
मेरी ख़ुश्बू की तरह रात कर ऐ सन्नाटा
यूँ न हर रोज़ मुझे तोड़ के रख दे ख़ामोश
मुझ-सा उनके भी तो हालात कर ऐ सन्नाटा
वो जो भूला है कभी याद दिलाने के लिए
उसकी महफ़िल में मेरी बात कर ऐ सन्नाटा
जो तड़पता है मेरे सीने में इक प्यास लिए
उस पे इक उम्र की बरसात कर ऐ सन्नाटा
वो जो बिछड़ा है मुझे देखने आएगा ज़रूर
बस किसी शाम की सौग़ात कर ऐ सन्नाटा
अब वो आवाज़ भी देती नहीं वीरानी में
तू ही पुर-ख़्वाब कोई बात कर ऐ सन्नाटा
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