उलझी हुई हम अपनी कहानी से भी आगे

15-05-2026

उलझी हुई हम अपनी कहानी से भी आगे

सत्यवान साहब गाज़ीपुरी (अंक: 297, मई द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)


मफ़ऊलु मफ़ाईलु मफ़ाईलु फ़ऊलुन
 
221    1221    1221    122
 
उलझी हुई हम अपनी कहानी से भी आगे
शायद निकल आए हैं रवानी से भी आगे
 
मंज़र धुआँ सा हो के भी सुलगा है उसी का
जो लाँघ गया हद को जवानी से भी आगे
 
मालूम है हमको ये फ़क़त लोग न समझें
पिघली हुई इक आग है पानी से भी आगे
 
तू इश्क को समझा था फ़क़त एक कहानी
हम जी के दिखाए हैं कहानी से भी आगे
 
ख़्वाबों को कोई क़ैद कहाँ बाँध सकी है
उड़ जाता है हर बार गिरानी से भी आगे
 
कुछ भी नहीं दुनिया, ये अँधेरा, ये उजाला
हम फिर से मिलेंगे कभी फ़ानी से भी आगे

0 टिप्पणियाँ

कृपया टिप्पणी दें

लेखक की अन्य कृतियाँ

ग़ज़ल
नज़्म
विडियो
ऑडियो

विशेषांक में