मेरे जाने के भी क़िस्सों से महक आएगी

15-05-2026

मेरे जाने के भी क़िस्सों से महक आएगी

सत्यवान साहब गाज़ीपुरी (अंक: 297, मई द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)

 

फ़ाएलातुन फ़इलातुन फ़इलातुन फ़ेलुन
 
2122    1122    1122    22
 
ओट बादल की हो रह-रह के चमक आएगी
झाँकता चाँद झरोखे से झलक आएगी
 
तेरे आँगन की हवा छू के गई है शायद
अब तो हर साँस में ताज़ी-सी गमक आएगी
 
तुझको ले जा के कहीं भी ये छुपा ले दुनिया
तू जहाँ होगी मोहब्बत की महक आएगी
 
सजती कुछ यूँ ही तेरी याद की गहरी रातें
तू न आए भी तो पायल की खनक आएगी
 
बेबसी छुप भी अगर जाए किसी पर्दे तले
तेरी मासूमियत आँखों से छलक आएगी
 
दिल में कुछ टूट के बिखरा है ख़मोशी बनकर
अब तो हर बात में हल्की सी कसक आएगी
 
‘सत्यवान’ अब तो यही सोच के जीता है दिल
मेरे जाने के भी क़िस्सों से महक आएगी

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