तेरी ज़ुल्फ़ पर रात बीमार होगी

15-06-2026

तेरी ज़ुल्फ़ पर रात बीमार होगी

सत्यवान साहब गाज़ीपुरी (अंक: 299, जून द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)


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जुनूँ हो तो क़िस्मत भी लाचार होगी
मोहब्बत से नफ़रत की फिर हार होगी
 
सफ़र में मुलाक़ात फिर यार होगी
जुदाई की हर रुत भी बेकार होगी
 
किसी मोड़ पर हम भटकते मिलेंगे
भले दरमियाँ ऊँची दीवार होगी
 
तेरे दिल में मेरी बुझी लौ जो धधके
तो आँखों ही आँखों में तकरार होगी
 
हवाओं में यूँ हाथ जो तुम हिलाए
तेरी बेबसी सीने के पार होगी
 
तुझे देख कर चाँद भी राह भूला
तेरी ज़ुल्फ़ पर रात बीमार होगी
 
जो बरसों से दिल में दबी हसरतें हैं
लबों पर वही बात इस बार होगी
 
सहे दर्द दुनिया के जितने भी ‘साहब’
मेरी हर ग़ज़ल ही असरदार होगी

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