सत्यवान साहब गाज़ीपुरी
सत्यवान साहब, भूतपूर्व सैनिक
ज़िला: गाज़ीपुर, उत्तर प्रदेश
लेखक की कृतियाँ
- ग़ज़ल
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- अकेले मिलेगा कहाँ चाँद फिर से
- उलझी हुई हम अपनी कहानी से भी आगे
- चाह मिलने की जागी सनम है
- जुदा भी हों तो किसी से कोई ख़फ़ा न लगे
- जो यूँ नाज़-ए-उल्फ़त में खोते फिरोगे
- झिलमिलाती जो झरोखों से वहीं झिलमिल हो तुम
- ठहरे न मगर वक़्त, धुरी की तरह क्यूँ है
- दिल को मेरे नाम ज़रा करके देखो
- दिल ने समझा तुझे ही हल शायद
- बन के माँझी कोई पतवार लिए बैठा है
- मेरे जाने के भी क़िस्सों से महक आएगी
- रोकने को तो खड़ा पूरा ज़माना होगा
- वक़्त से आर-पार करता हूँ
- हुस्न वालों से खुले-आम हवा दिल्ली की
- नज़्म
- विडियो
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- ऑडियो
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