हम फ़क़त आइना दिखाते हैं
सत्यवान साहब गाज़ीपुरी
ख़फ़ीफ़ मुसद्दस मख़बून महज़ूफ़ मक़तू
फ़ाइलातुन मफ़ाइलुन फ़े'लुन
2122 1212 22
हर जगह ही धमाल करते हैं
आप सबका ख़याल करते हैं
अपने किरदार की हिफ़ाज़त में
लोग कितना बवाल करते हैं
आप झुकते गिने-चुनों की तरफ़
काम यूँ बस दलाल करते हैं
यूँ जले पर नमक छिड़कते क्यों
आप जीना मुहाल करते हैं
हम फ़क़त आइना दिखाते हैं
आप फिर क्यों मलाल करते हैं
आप इतना बदल गए कैसे
हम तो बस इक सवाल करते हैं
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