मन को बच्चा ही रहने दो

01-06-2026

मन को बच्चा ही रहने दो

दीपमाला (अंक: 298, जून प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

बड़े चाहे जितने हो जाओ
मन को बच्चा ही रहने दो
 
मन होगा गर बच्चे जैसा
निश्छल प्रेम को समझोगे तुम
अगर होगी भी कभी लड़ाई
मिनटों में सुलझा लोगे तुम
झगड़े कितने भी हो जाएँ
मन को बच्चा ही रहने दो। 
 
बच्चा होने में ही असली
जीवन का आनंद है भैया
बड़े हो गए जिस दिन तुम
जीवन होगा जंग ओ भैया
उम्र भले कितनी बढ़ जाए
मन को बच्चा ही रहने दो। 
 
बच्चे सा मन होगा कोमल
मन के भाव समझ जाओगे
उनके जैसा दिल होगा तो
सबके दिल में रह पाओगे
करो दूर मन से कटुताएँ
मन को बच्चा ही रहने दो। 
 
यूँ ही बच्चे गर बने रहोगे
बचपन जीवंत रहेगा सदा ही
नीरस होगा कभी ना जीवन
ख़ुशियाँ यूँ ही रहेंगी सदा ही। 
दूर छिटक सारी चिंताएँ
मन को बच्चा ही रहने दो। 

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