लिखते हुए

01-02-2026

लिखते हुए

अमित राज श्रीवास्तव 'अर्श’ (अंक: 293, फरवरी प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

कितना अच्छा लगता है
उसके बारे में लिखना भी। 
उसके बारे में लिखते वक़्त
हम शिकायत नहीं करते, 
हम उसे बचा लेते हैं
समय की आँच से। 
कुछ लोग ज़िंदगी से चले जाते हैं, 
लेकिन लिखते समय
वो फिर सामने बैठ जाते हैं, 
बिल्कुल वैसे ही
जैसे कभी थे। 
इसलिए अच्छा लगता है। 
क्योंकि लिखते हुए
हम उसे खोते नहीं, 
हम उसे समेट लेते हैं। 

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