कुछ वक़्त में कहानियाँ बदल जाती हैं

15-06-2026

कुछ वक़्त में कहानियाँ बदल जाती हैं

ममता मालवीय 'अनामिका' (अंक: 299, जून द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)

 

कुछ वक़्त में, 
कहानियाँ बदल जाती हैं। 
बेजान, बेरंग, मुरझाई समा में, 
बहार ख़ुशियों की आ जाती हैं। 

जिसके हक़ की बूँदें, 
संगृहीत थीं आसमां में। 
एक दिन उसी के आँगन में, 
जा कर वो बरस जाती हैं। 

नियति इस तरह अपना 
खेल दिखाती है। 
गोधूलि बेला में, 
सूरज-चाँद को मिलाती है। 

जो घटनाएँ लगती हैं, 
असम्भव सी कभी। 
कायनात उसे भी एक वक़्त पर, 
सम्भव बना जाती है। 

हर किसी के जीवन में, 
दुःख की घड़ी आती है। 
हर पीड़ा की अनुभूति हमें, 
नया अध्याय सिखाती है। 

तुम सबक़ सीखते हुए, 
आगे बढ़ते रहना ‘अनामिका’। 
क्योंकि कुछ वक़्त में ही, 
कहानियाँ बदल जाती हैं। 

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