नए साल में
पं. विनय कुमारनए साल में बदलें हम अपने आपको
पूर्व के दोष-गुण–
सोचें-समझें–
तद्नुरूप करें कार्य–
जीवन को नई ऊर्जा से भरें–
नई चेतना जगाएँ–
नए साल में बहुत-कुछ करने का
संकल्प लेना होगा–
यह साल हर बार हमें
बहुत-कुछ सीखने को देगा।
नए-नए अवसर
नई-नई परिस्थितियाँ
जीवन के सुख-दुख
हर्ष-विषाद
नए मार्गों
और नूतन लक्ष्यों को
सफलतापूर्वक पार करते हुए
हमें जीवन-सत्य के साथ चलना होगा।
जीवन-सत्य, जो हमारे बेहद क़रीब है।
हमारी बाँहों में अठखेलियाँ कर रहा है वह
हमारे जीवन का लक्ष्य–
हमारे आसपास फैला संसार–
समस्त जड़-चेतन,
आबोहवा–
प्रकृति का सुरम्य वातावरण–
रास्ते की थकान,
घुटन,
चिंता और
किंकर्तव्यविमूढ़ मनःस्थितियाँ–
सब को झेलते हुए पार करना है।
नए साल में–
जीवन के ख़ूबसूरत सपनों को
निज चिर प्रतिक्षित लक्ष्यों को
हर रोज़ सामने रखकर
पूरा करने के लिए अनवरत
साधनारत रहना होगा।
विगत साल की असफलताजन्य निराशाएँ
भुलाने के साथ,
नए साल की ख़ुशियाँ
हर रोज़–अपने भीतर सजाकर रखना होगा।
जीवन का सत्य यह है
कि यदि हमारी इच्छाएँ पूर्ण नहीं होती और
आकांक्षाओं पर पानी फिरने लगता है तब–
हमारे भीतर निराशा, हताशा, दुख-दर्द के
बादल का गहराने लगते हैं
जीवन को सफलता के साथ
नए ढंग से जीने के लिए
हमें अपने कर्तव्य-कर्म में लगे रहना होगा
हमारा कर्म,
हमारा प्रयास,
हमारी हर दिन की कोशिश,
हमारे भीतर की जिज्ञासा
हमारे भीतर का जुनून
लक्ष्य को पा लेने का पागलपन
यही सब–
हमें सफलता की ओर ले जाएगा . . .
हमारा सही लक्ष्य हो
सही गहरी और बौद्धिक सोच हो
प्रयासरत बने रहने का
जज़्बा हो
हमारे भीतर ईमानदारी पूर्वक
कर्म करने की जिजीविषा हो
अपना अनुभव,
अपनी ज्ञान-राशि,
बुज़ुर्गों,
शिक्षकों,
गुरुजनों,
माता-पिताओं,
भाई-बहनों,
पड़ोसियों,
मित्रों
बंधु-बांधव,
सगे-संबंधियों का सुझाव,
उनका मार्गदर्शन–
सब मिलाकर हमें ज़रूर
और ज़रूर सफलता दिलाएँगे।
दूर करना होगा केवल भीतर की
निराशा–
हताशा-
घुटन-
दुःखानुभूति–
चिंता-
तनाव-
टेंशन-
अवसाद-
आलस्य-
ईमानदारी रहित जीवन-पद्धति-
और–
अनुशासनहीनता,
उद्दंडता,
उच्छृंखलता,
मर्यादा रहित चिंतन
और
कुत्सित विचारधारा का स्वभाव . . .!
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