पबित्र मोहन प्रधान: भारत रत्न के दावेदार

पबित्र मोहन प्रधान: भारत रत्न के दावेदार  (रचनाकार - दिनेश कुमार माली)

विचार

 

 

“पबित्र बाबू के जीवन-संग्राम और साधना ओड़िशा के गड़जात प्रजा आंदोलन की ऐतिहासिक धुरी थी।” 

मालती चौधुरी 
महान स्वतन्त्रता सेनानी एवं 
ओड़िशा के प्रथम मुख्यमंत्री नब कृष्ण चौधुरी की धर्मपत्नी

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“भारत छोड़ो आंदोलन के समय जेल की दीवार फाँदकर, तालचेर राजमहल पर आक्रमण के प्रयास और जयप्रकाश के निर्देशानुसार अपने प्राणों की बाज़ी लगाकर छत्तीसगढ़ एवं उत्तर पूर्वांचल असम, मणिपुर, नगालैंड, त्रिपुरा राज्यों में प्रजामंडल के गठन में पबित्र बाबू की महत्त्वपूर्ण भूमिका थी।” 

-सुरेंद्रनाथ द्विवेदी 
महान स्वतंत्रता संग्रामी
एवं पूर्व राज्यपाल-अरुणाचल प्रदेश

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“1961 के ओड़िशा विधानसभा चुनाव में तालचेर और पाललहड़ा-परजंग जैसे दो निर्वाचन क्षेत्रों से ढेंकानाल राजा शंकर प्रताप बहादुर तथा तालचेर राजा के भाई आह्लाद चंद्र देव को भारी मतों से हराने के कारण पवित्र मोहन प्रधान को मैं “चुनावी वीर” की उपाधि से नवाज़ता हूँ।” 

-पंडित जवाहरलाल नेहरू
 पूर्व प्रधानमंत्री, भारत सरकार

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“पवित्र बाबू करोड़ों में एक थे।” 

-युधिष्ठिर दास
ओड़िशा विधानसभा (1990-95) के अध्यक्ष

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“पवित्र बाबू नहीं होते तो गड़जात विलय नहीं हो सकता हो पाता।” 

-वीर वैष्णव पटनायक
 ढेंकानाल प्रजामंडल आंदोलन के प्रमुख नेता
 तथा पूर्व लोकसभा सदस्य, ढेंकानाल

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 “अँधेरे मुल्क में पवित्र बाबू उजाले की किरण थे।” 

-पद्मचरण नायक
 महान गाँधीवादी

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“गड़जात विलय के बाद हरेकृष्ण महताब राजा-रजवाड़ों को पुनर्स्थापित करना चाहते थे, परन्तु पवित्र बाबू के कट्टर विरोध के कारण यह सम्भव नहीं हो सका। 

-सुरेंद्र मोहंती
पूर्व सांसद व प्रसिद्ध ओड़िया लेखक
 

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