उम्र भर रहते नहीं हैं 
संग में सबके उजाले।
हैसियत पहचानते हैं 
ज़िन्दगी के दौर काले।

तुम थके हो मान लेते-
हैं सफ़र यह ज़िन्दगी का।
रोकता रस्ता न कोई
प्यार का या बन्दगी का।

हैं यहीं मुस्कान मन की
हैं यहीं पर दर्द-छाले। 
तुम हँसोगे ये अँधेरा,
दूर होता जाएगा।

तुम हँसोगे रास्ता भी
गाएगा मुस्कराएगा।
बैठना मत मोड़ पर तू
दीप देहरी पर जलाले।
 

0 Comments

Leave a Comment

लेखक की अन्य कृतियाँ

बाल साहित्य कविता
साहित्यिक आलेख
कविता
नवगीत
लघुकथा
सामाजिक आलेख
हास्य-व्यंग्य कविता
पुस्तक समीक्षा
बाल साहित्य कहानी
कविता-मुक्तक
दोहे
कविता-माहिया
विडियो
ऑडियो